
गम के सफर से थक के चूर हो गया
लुफ्त जीने का यहाँ भरपूर हो गया
अना की खोच लगी थी नादानी मे
रिसते-रिसते आज वो नासूर हो गया
उसके पाँव के नीचे तक तो वो धूल था
बावरी ने माँग मे भरा सिंदूर हो गया
ख्वाबो मे शीशमहल बनाया था"मीत"
आँख खुलते ही वो चकनाचूर हो गया
लुफ्त जीने का यहाँ भरपूर हो गया
अना की खोच लगी थी नादानी मे
रिसते-रिसते आज वो नासूर हो गया
उसके पाँव के नीचे तक तो वो धूल था
बावरी ने माँग मे भरा सिंदूर हो गया
ख्वाबो मे शीशमहल बनाया था"मीत"
आँख खुलते ही वो चकनाचूर हो गया
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